मैं, मेरा कल, मेरा आज, मेरा कल और कुछ भी नहीं
एक धोखा एक द्वंद हर पल और कुछ भी नहीं
मैं चलुं और चलती रहुँ युंही अटल और कुछ भी नहीं
मैं रोकुं या रूक जाऊँ यहीं निश्चल और कुछ भी नहीं
कभी क्रंदन रूदन कभी पलकों का जल और कुछ भी नहीं
जिंदगी सुरों भरा गीत या गज़ल और कुछ भी नहीं
कभी उड़ता गगन में मन चंचल और कुछ भी नहीं
कभी आसमानों से गिरता धरातल और कुछ भी नहीं
कभी युं ही रूलता फिरता दिल पागल और कुछ भी नहीं
कभी दिल में उठती लहरों की खलबल और कुछ भी नहीं
कभी खिंच ले जाता दर्द भरा दलदल और कुछ भी नहीं
कभी प्रेम की बारिशों में भिगाता हुआ बादल और कुछ भी नहीं
मैं, मेरा कल, मेरा आज, मेरा कल और कुछ भी नहीं !!
~संगीता

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