Sunday, February 24, 2019

और सुबह हो गयी



एक ख्याल भर आने की देर है 
नींद तुझमें और मुझमें फासले आ जाते हैं
अभी अभी मिलने आयी थी
चुप सी शर्मायी सी 
खामोशियों भरी गहरायी सी 
नींद अभी अभी तो तू आयी थी 
बस मिल ना पायी....
एक ख्याल ने भी दस्तक दी थी
अभी अभी शोर सा था 
ऐसे आया मानों चोर सा था 
भाग रहा चारों ओर सा था
मैं पकड़ने लगी पर मिल ना पायी 
ना ख्याल से ना तुझसे 
और फासले आते गए
कुछ ख्याल से कुछ तुझसे
और नींद तू जाने लगी थी
पर ख्याल ने रुकना चाहा
मुझसे तो पूछ लेती
किसको रखूं तुझको या ख्याल को 
तूने पूछा नहीं और तू चली गयी
ख्याल रुक गया और सुबह हो गयी !!

~संगीता 

Sunday, February 10, 2019

जिद्दी से हम आज भी



इसी तैश में लोग सड़ते गए,
वो पत्थर फेंकते गए, हम आगे बढ़ते गए !

वो जिद्दी कह कह कर, करते रहे ज़माने भर की तौहीन,
हम फिर भी अपनी बात पर अड़ते गए !

क़ीमत ना समझी अपनों ने अपनों की,
कुछ इस तरह ही रिश्ते बिगड़ते गए !

जज़्बात और हालात की आँधियों में,
दिलों के शहर उजड़ते गए !

मिले बहुत हमराह फिर तन्हा राह में,
हम उन मोतियों को माला में जड़ते गए !

जिद्दी से हम आज भी उस राह पर,
हाथ में माला लिए, बढ़ते गए, बस बढ़ते गए !

~संगीता