नींद तुझमें और मुझमें फासले आ जाते हैं
अभी अभी मिलने आयी थी
चुप सी शर्मायी सी
खामोशियों भरी गहरायी सी
नींद अभी अभी तो तू आयी थी
बस मिल ना पायी....
एक ख्याल ने भी दस्तक दी थी
अभी अभी शोर सा था
ऐसे आया मानों चोर सा था
भाग रहा चारों ओर सा था
मैं पकड़ने लगी पर मिल ना पायी
ना ख्याल से ना तुझसे
और फासले आते गए
कुछ ख्याल से कुछ तुझसे
और नींद तू जाने लगी थी
पर ख्याल ने रुकना चाहा
मुझसे तो पूछ लेती
किसको रखूं तुझको या ख्याल को
तूने पूछा नहीं और तू चली गयी
ख्याल रुक गया और सुबह हो गयी !!
~संगीता

